Stories List
Everlasting stories from timeless authors
(कालजयी लेखकों की यादगार कहानियाँ)

अजगर ( हिंदी लोक-कथा )
बहुत वर्ष पहले एक राजा की दो रानियाँ थीं। बड़ी रानी शोभा ब हुत अच्छे स्वभाव की दयावान स्त्री थी। छोटी रानी रूपा बड़ी कठोर और दुष्ट थी। बड़ी रानी शोभा के एक पुत्री थी, नाम था देवी। रानी रूपा के भी एक बेटी थी, नाम था तारा
रानी रूपा बड़ी चालाक और महत्वाकाँक्षी स्त्री थी। वह चाहती थी कि राज्य की सत्ता उसके हाथ में रहे। राजा भी उससे दबा हुआ था। रानी रूपा बड़ी रानी और उसकी.....

नागकन्या ( अरुणाचल प्रदेश की लोक-कथा )
बहुत पहले भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में एक गांव था मिसमा। वहां एक अनाथ मछुआरा रहता था ताराओन । एक दिन वह मछली पकड़ने गया । उस दिन मछली के स्थान पर एक नाग उसके जाल में फंस गया । दरअसल, वह नाग, नागलोक का राजा था | अपने पिता को जाल में फंसा देखकर नागकन्या घबराई। उसने सुन्दर स्त्री का रूप धारण कर लिया । वह ताराओन के पास पहुंचकर बोली-“यदि तुम मेरे पिताजी को छोड़ दोगे.....

आठवीं चाबी ( हिंदी लोक-कथा )
सिंध का एक बुद्धिमान राजा जब बूढ़ा हो गया और उसे लगा कि वह अधिक नहीं जीएगा तो उसने अपने दीवान को बुलवाया और उसे आठ चाबियाँ देते हुए कहा, “मेरे कूच का समय नज़दीक आ गया है। राजकुमार जब तक बड़ा नहीं हो जाता आप सिंहासन की रक्षा करें। जब वह ख़ुद राजकाज चलाने लायक हो जाए तो आप उसे सात चाबियाँ दे दें, पर आठवीं उसे पाँच बरस शासन करने के बाद ही दें।” दीवान ने.....

आलसियों का आश्रम ( हिंदी लोक-कथा )
एक बार एक राज्य में बहुत सारे लोग आलसी हो गए। उन्होंने सारा कामधाम करना छोड़ दिया। यहाँ तक कि अपने लिए खाना बनाना भी छोड़ दिया और खाने के लिए दूसरों पर निर्भर रहने लगे। ज्यादातर समय वे लेटे रहते या सोते रहते।
खाने की समस्या का निराकरण जरूरी था क्योंकि इन आलसियों को खिलाने में लोग आनाकानी करने लगे। एक दिन सभी आलसियों ने राजा से मांग की की सभी आलसियों.....

आर्किड के फूल ( अरुणाचल प्रदेश की लोक-कथा )
आर्किड और आर्किड जैसे सुन्दर फूलों के सम्बन्ध में लोगों में अनेक प्रकार के विश्वास और किंवदन्तियाँ प्रचलित हैं।
कहते हैं कि किसी समय एक बड़ा नेक और ईमानदार राजा राज्य करता था। उसके राज्य में ऊँचे-ऊँचे पहाड़, घने जंगल, हरे-भरे बगीचे, कल-कल करती नदियाँ और सुन्दर-सुन्दर पशु-पक्षी थे। राजा अपनी प्रजा का बहुत ध्यान.....

झूठ का मुक़ाबला ( हिंदी लोक-कथा )
किसी गाँव में एक बनिया किराने की दुकान करता था। एक दिन शहर जाते हुए रास्ते में उसे एक जाट मिला। महाजन को कर्ज़ की क़िस्त चुकाने के लिए जाट भी उसी शहर को जा रहा था। यह कर्ज़ उसके परदादा ने अपने परदादा के मृत्युभोज के लिए लिया था। सौ रूपए का कर्ज़ सूद जुड़ते-जुड़ते पचास बरस में बढ़कर एक हज़ार रूपए हो गया था। बेचारा जाट इस चिंता में डूबा चला जा रहा था.....

फैसला ( हिंदी लोक-कथा )
कई वर्ष
